अब सपनो पर कोई रोक नही….

नम सी आँखों मे होती हैं ना कोई ख़ुशी,

मिल जाए हर चीज़ भी,

क्यों की मन तोह भीतर की ठण्ड में बंद ही होता हैं।

अपने सपनो को फिर वो सपनो में ही जीता हैं।
तोह बस अब और नही,

अब सपनो पर कोई रोक नही।
मेरे पंख पिंजरे से निकाल दो,

या तोह ज़िन्दगी से आज़ाद करो, या मुझे गगन में उछाल दो।
मुझे बनने दो एक बंजारा,

गुमने दो जग सारा,

या मेरे जितने भी सवाल हो,

उनका तुम जवाब दो।
मुस्कुरा तोह दूंगा तुम्हारी ममुस्कुरात के लिए,

कभी तोह मेरी हँसी को मेरे सपनो की आवाज़ दो।
मुझे सागर में डूब जाने के डर से उतरने से रोकना मत,

अगर मैं दुब भी जाउ तोह खुदको कोसना मत,

क्योंकि दरिया ही तोह ज़नदगी है,

कीनारा तोह बस एक मंज़िल पल भर की हैं।

मिले तो अच्छा, ना मिले तोह कोई ग़म नही।

जो उतरे ही ना दरिया में कम से कम उनसे तोह हम कम नही।