My BIG Green Friend

You grew and grew, incited me to be unfaltering,
Made me inexorable and my dreams uncompromising.

You were not just a tree,

You were home for many and also my family.

You were my childhood friend,

I still remember swinging on an unused plank

which was tied to your hand.

Once a dog ran after me and I climbed on you,

He couldn’t do the same, I knew.

I plucked your flowers but you never grumbled

I drew on you, I teased you, I played on you but you never got annoyed, you remained humble.

But now where are you my big green friend?

I don’t know why they killed you. These murderers, I will never forgive them.

I sometimes go to the place where you once stood.

Reminiscing the memories of my childhood.

They say now that it is a beautiful place.

But all I can see is your grave.

आरक्षण

हम आरक्षण के शिकार है।

अपने ही देश में हो रहा हमारा तिरस्कार है ।

सपने उचे होते है ,

उचे होते है फैसले,

फिर भी ना जाने क्यों आरक्षण के नाम पर डगमगा जाते है हौसले।
लोकतंत्र समानता पर टिका है।

जो के संविधान में लिखा है।

सब देशवासी हमारे भाई है , ये हमने सिखा है।

पर आरक्षण से देश का बटवारा हि दिखा है ।
जिसे कुछ नहीं आता, वो सब कुछ बन बैठा

और जिसे सब कुछ है आता, वो इस आरक्षण की मार को है सहता।

क्या ये अधिकारों का हनन नही?

मानवता का दुःख भरा कथन नही?

अब और चुप रहना क्या सही होगा?

क्यों चुप रहकर और दे हम देश को धोखा .

You can’t call me yours again

I ​want to talk ,

About the unsaid time.

But the way I got broken,

I can’t cling.

I feel awkward and shy,

Feeling tough to open up to someone who i used to call my ally.

It’s strange and unusual,

That forgiving is not possible.

May be you still keep me first 

But somehow you lost “us”

My trust is something you will never gain

And I will not let you make me cry again.

Vo ek waqt tha, ab ek waqt hai…

​Ek waqt tha

Jab dil mai Jo rakt tha

Usme dard tha

Karta Jo besabr tha

Sab kam tha

Khushi nhi, bas gum tha

Ek insaan tha

Jo badnaam tha

Na wajud tha 

Na vo kud tha

Bas kala har taraf tha

Man toh jese barf tha

Shaant tha Par sakt tha

Jese niche dukh ka takt tha

Pigalta tha 

Machalta tha

Samalta tha

Par kuch bhi Ho na vo badalta tha….

Ab ek waqt hai

Ab dil mai Jo rakt hai

Uska ek Hi karm hai

Karta Jo prem prasang hai

Sab kuch hai

Khushi itti! Jo sach hai

Ek insaan hai

Jiska ab ek naam hai

Jisko mila ek wajud hai

Dekha kisiko toh laga jese vo kud hai

Bas ab rang har tarf hai

Jal gayi vo barf hai

.

.

.

Ye sab hua hai kyuki tu hai

Mil gayi atma, mil gayi ruh hai

Ab uss barf ki thandak hai

Aur pyar ki mehek hai

Kuch karne k liye vo garm hai

Aur tu Hi

Ha bas tu hai

Tu Hi mera dharm hai

मेरा खोया हुआ बचपन

किताबो का ही अब साथ रहा है.

साथ तोह उस बचपन का भी था पर ना जाने अब वो कहा है.

ऐसा लगता है अब हम आगे आगये और वो पीछे रह गया,

इस दिल में बचपना तोह अब भी है पर ना जाने वो कहा खो गया.

कभी मस्ती, कभी दोस्ती तोह था कभी एक अपनापन.

कोई मुझे बता दो कहा है, दुंद रहा हु में जिसे, मेरा खोया हुआ बचपन….
एक वक़्त था जब बारिश मई भिघा करते थी,

साइकल पे टहलते दुबते सूरज को देखा करते थी,

ना कुछ पाने की चाहत थी, ना कुछ खोने का डर,

कितना शानदार था उस वक़्त ज़िन्दगी का सफर.

कितना मीठा महसूस करता था मन.

कोई मुझे बता दो कहा है, दुंद रहा हु में जिसे, मेरा खोया हुआ बचपन…

अब जब सपने आखो ढल गए,

लगता है जैसे अब सब वो दिन भूल गए.

अब तोह जैसे कोई उन दिनों को याद करने की कोशिश भी नही है करता,

कही आंसू ना आजाये इस बात से दिल है डरता.

याद करो वो पल, वो यारी, वो अन-बन…

कोई मुझे बता दो कहा है, दुंद रहा हु में जिसे, मेरा खोया हुआ बचपन…

निकल जाते है लोग घर से 

निकल जाते है लोग घर से ना माने माने अपने मन को,

दुनिया से लड़के, सवारने अपने जीवन को.

अपने नए से होते है रिश्ते,

नयी सी होती है दुनिया.

बनते है नाये से किस्से,

नयी बनती है कहानिया.
निकल जाते है लोग घर से ना माने माने अपने मन को,

दुनिया से लड़के, सवारने अपने जीवन को.

एक भोला सा परिंदा बिना पर का

जो ना जाने अपना रास्ता सफर का.

गिरता, संभालता, फिसलता, फिर भी वो चलता.

फसता, उलझता, फिर भी वो बढ़ता.
निकल जाते है लोग घर से ना माने माने अपने मन को,

दुनिया से लड़के, सवारने अपने जीवन को.

कभी कामयाबी होती है,

तोह कभी जित हार कर सोती है.

पर फिर भी खुश रहना आजाता है.

यही तोह जीवन कहलाता है.
निकल जाते है लोग घर से ना माने माने अपने मन को,
दुनिया से लड़के, सवारने अपने जीवन को